लंबी अवधि के लिए म्यूचुअल फंड में करे निवेश

म्यूचुअल फंड सभी के लिए है। दुनिया भर के लाखों निवेशक म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे हैं क्योंकि इनसे उन्हें भविष्य की आसान और सुविधाजनक योजना बनाने में मदद मिलती है। म्यूचुअल फंड क्या है और वित्तीय लक्ष्यों तक पहुंचने में ये किस तरह मदद दे सकते हैं , यह हम तफ्सील से जानेंगे लेकिन उससे पहले निवेश के कुछ अहम पहलुओं पर गौर करना भी जरूरी है। सबसे पहले अपनी वित्तीय जरूरतों और लक्ष्यों को जानें। मुझे कब पैसे की जरूरत होगी और किस काम के लिए , इस तरह के सवालों के जवाब खोजने की कोशिश कीजिए। अपने वित्तीय लक्ष्यों की सूची तैयार करें जैसे पुत्र या पुत्री की उच्च शिक्षा , मकान खरीदना आदि। साथ ही इस बात का अंदाजा भी लगाएं कि आपको इन तमाम जरूरी कामों के लिए कितनी रकम की जरूरत होगी। इन सवालों के जवाब आपको निवेश की अवधि तय करने में मदद देंगे। लक्ष्य और वक्त के मुताबिक अपने निवेश का मिलान करें। रिटायरमेंट या बच्चों की शिक्षा जैसे लंबी अवधि के लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए इक्विटी फंड को चुनें जो तेजी से बदलती परिस्थितियों के मद्देनजर शॉर्ट टर्म की अपेक्षा आपको अपेक्षित रिटर्न मुहैया कराएगा। छोटी मियाद के लक्ष्यों के लिए पूंजी बाजार या कैश फंड में निवेश करें। यह आपको ज्यादा स्थिरता दे सकते हैं।

जोखिम

निवेश से संबंधित कोई भी फैसला करने से पहले यह जानना अहम है कि आप कितना जोखिम ले सकते हैं। इस बात पर गौर करें कि आप अपने निवेश के मूल्यांकन में उतार - चढ़ाव को लेकर सहज रह पाएंगे या नहीं। निवेश में यह बात कोई मायने नहीं रखती कि आपका पैसा इक्विटी में लगा हो और लघु अवधि के तेजी से बदलते हालात के चलते आपके रातों की नींद उड़े लेकिन यह सुनिश्चित करना भी जरूरी कि आपका निवेश लंबी अवधि के वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने में मददगार साबित हो।

अनुशासन

पद्धति के मुताबिक निवेश करने से निवेशकों को इक्विटी मार्केट में पैठ बनाने का अच्छा आधार मिल जाता है। इसके अलावा अनुशासित निवेश से बाजार में उतार - चढ़ाव के वक्त भी निवेश में स्थिरता मिलती है।

टैक्स लाभ

म्यूचुअल फंड में निवेश करने से कर बचाने में भी मदद मिलती है। इसके अलावा कुछ विशेष फंड में निवेश कर आप धारा 80 सी के तहत कर लाभ ले सकते हैं। लाभांश यानी डिविडेंड का पैसा सीधा निवेश के हाथ में पहुंचता है जो करमुक्त होता है।

योजना पर डटे रहें

निवेश करने से पहले इस बात की अच्छी तरह जांच - परख कर लें कि वर्तमान संपत्ति और व्यवसाय पर उसका क्या असर पड़ सकता है। जैसे - जैसे वक्त बीतेगा , आपकी जिंदगी में बदलाव आता रहेगा इसलिए आपको नियमित रूप से अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा कर उसमें वांछित बदलाव भी करने होंगे लेकिन कम वक्त की उथल - पुथल की वजह से लंबी अवधि की योजना से छेड़छाड़ किया जाना समझदारी नहीं है। आसान शब्दों में कहा जाए तो निवेश पूंजी बढ़ाने और भविष्य में वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है लेकिन अगर फैसले गलत होंगे तो उनका नतीजा भी हमारे खिलाफ ही जाएगा।

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म्यूचुअल फंड में निवेश पर सवाल जवाब

1 मैंने कहीं पढ़ा है कि 'चतुर निवेशक या तो बाजार में 5 फीसदी या उससे ज्यादा की हर गिरावट पर छोटी राशि का निवेश करते हैं या एसआईपी का माध्यम चुनते
हैं।' यह बात कहां तक सही है?

अगर कोई चतुर निवेशक लगातार गिरावट में खरीदने और बाजार चढ़ने पर बिकवाली करने में कामयाब रहे तो इससे बेहतर और क्या हो सकता है। लेकिन गिरावट को परिभाषित करना काफी मुश्किल है। जनवरी 2008 से बाजार गिरता ही जा रहा है। ज्यादातर पेशेवर और निवेशक बाजार की चाल का अंदाजा लगाने में नाकाम हैं। इक्विटी से पैसा बनाने का तरीका यह है कि बढि़या शेयरों का पोर्टफोलियो बनाएं और संयम के साथ उसे बरकरार रखें। दूसरा विकल्प है म्यूचुअल फंड के जरिए तैयार पोर्टफोलियो खरीदना और नियमित रूप से उसमें निवेश करना। एसआईपी अनुशासन सुनिश्चित करता है और गिरावट के वक्त घबराहट से निपटने में मदद देता है। यह इक्विटी से मुनाफा बनाने का सर्वश्रेष्ठ तरीका है।

2 मैं एसआईपी निवेशक हूं और संतुलन के लिए पोर्टफोलियो में बदलाव करना चाहता हूं। मदद कीजिए।
अगर आप डेट और इक्विटी में 60 : 40 का अनुपात रखना चाहते हैं तो इक्विटी में गिरावट आने पर डेट से अपनी रकम धीरे-धीरे इक्विटी के खाते में ले जाएं। ऐसा नियमित रूप से करते रहने पर आप इक्विटी से तब फायदा ले सकेंगे जब इसमें आपका निवेश बढ़ता जाएगा और बाजार चढ़ेगा। संतुलन लाने के कई तरीके हो सकते हैं। इक्विटी या डेट से फायदे पर लगने वाला कर संतुलन की प्रक्रिया में अवरोध साबित हो सकता है। इसलिए रिबैलेंसिंग से जुड़ा सिद्धांत यह होना चाहिए कि आवंटित राशि से जुडे़ हालात पूरी तरह उलट जाने तक लगातार ऐसा नहीं करना चाहिए। सालाना रिबैलेंसिंग कर के मामले में किफायती साबित हो सकती है क्योंकि लंबी अवधि में इक्विटी से मिलने वाले मुनाफे पर कर नहीं लगता।

3 क्या नाबालिग म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं?
जी हां। नाबालिग म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं लेकिन केवल अभिभावक के जरिए। वयस्क अभिभावक म्यूचुअल फंड की यूनिट रख सकता है और नाबालिग की ओर से उन्हें निवेश कर सकता है। आपको अपने बेटे या बेटी की उम्र के प्रमाण के साथ एएमसी पेश करना होगा और साथ ही यूनिट रखने और उन्हें इस्तेमाल करने की दक्षता का सबूत भी देना होगा।

4 कोई भी कंपनी आखिर कैसे माकेर्ट कैपिटलाइजेशन के आधार पर लार्ज, मिड या स्मॉल माकेर्ट कैप कैटेगरी में आती है। क्या किसी श्रेणी विशेष के लिए कोई सीमा तय है?

बीएसई पर सूचीबद्ध सभी शेयरों को माकेर्ट कैपिटलाइजेशन के आधार पर घटते क्रम में रखा जाता है। जो शेयर कुल माकेर्ट कैपिटलाइजेशन का शीर्ष 70 फीसदी हिस्सा रखते हैं, उन्हें लार्ज कैप कहा जाता है जो 40 से 90 फीसदी के बीच आते हैं उन्हें मिड-कैप कहा जाता है जबकि अंतिम 10 फीसदी हिस्सा रखने वाले स्मॉल कैप में शुमार किए जाते हैं। 30 नवंबर 2008 को 58 शेयर लार्ज कैप के थे।

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